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An Ode To Gulzar

August 19, 2013

19th August was the 79th birthday of the most prolific lyricist, poet, script writer, film maker etc. Mr. Sampooran Singh Kalra who is known by his pen name GULZAR and as an admirer of his unique skills, my ode to the person:

अधूरा सम्पूर्ण के तलाश मे

सम्पुर्ण से जलता हूँ मैं,

वो रहता हैं सूफ़ियों के साथ औरउसके पड़ोस मे रहतें हैं ग़ालिब,टागॉर,कबीर,विली और ना जाने कौन-कौन.

कभी ग़ालिब बिरियानी खिलाते हैं तो कभी कबीर खिचरी, विली भी सवेरे सवेरे-सवेरे कॉफी पे बुलाते हैं,टागॉर के साथ माच-भात का लंच रोज़ चलता हैं.

क़लम माँगा था उधार पे, इनकार कर दिया, क्यों के क़लम के कजरा से वो बीड़ी जलाते हैं.

अजीब हरकतें करता हैं, कभी फूल को चड्डी पहानके खिलाता हैं, कभी दिल से पर्सनल सा सवाल करता हैं, कभी बल्लिमारान मे बड़ी बी के दुपट्टाका कोना खिचता हैं, कभी ‘किनारा’ पे बैठ कर ‘आँधी’ की ‘खुश्बू’ लेता हैं, जिनसे उसका ‘परिचय’ भी नही.

उसकी छेड़खानी से तंग आ चुका हूँ मैं,

वो मुर्दा लाश को कैसे उतारा जाएँ उसका बेओरा देता हैं कहीं और फिर कहीं पड़ोसी का लिहाप की गर्मी महसूस करने का नसीहत देता हैं.

वो लब्ज़ों के जज़्बात के साथ गुलच्छर्रे उड़ाता हैं, और अपने आप को गुलज़ार कहता हैं.

सम्पूर्ण से जलता हूँ मैं, क्यॉंके मैं अधूरा हूँ!

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